महादेव शिव की पूजा में भूल से भी कभी ना अर्पित करना इसे वरना पूजा का आपको मिलेगा विपरीत फल,रुष्ट हो जायंगे महादेव….

मित्रों इस बात से तो आप सभी अवगत ही होगें सावन का महीना यानी भगवान शिव का महिना आने वाला है। इसके साथ ही आपको बता दें कि हिन्‍दु धर्म में अनेक देवी देवताओं की पूजा की जाती रही है, और कई तरह की प्रथायें भी है, जिसके अनुसार सभी देवी देवताओं की पूजा अलग अजग तरीके से की जाती रही है, पर आज हम भगवान भोलेनाथ की भक्ति के संबंध में कुछ खास जानकारी देने वाले है, जिससें आप लोग शायद ही अवगत होगें।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि भोलेनाथ अपने भक्‍तों पर जल्‍द ही खुश हो जाया करते है, अगर कोई चूक भी उनके भक्‍तो से हो जाती है, तो इतनी जल्‍दी गुस्‍सा नही होगें है, क्‍योंकि शिव जी भोले के समान है। इसीलिये इनका नाम भोलेनाथ भी है। हालांकि जब कभी शिव जी क्रोध में आते है, तो रौद्र रूप भी धारण कर लेते है।

हमारे धर्म शास्‍त्रों के साथ ही हिन्‍दु धर्म में प्रत्‍येक देवी देवताओं की पूजा की अलग अलग प्रथायें होती है, जिसके संबंध में हमारें ग्रंथों में सविस्‍तार बताया गया है। सभी जानते हैं कि भोलेनाथ को बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि प्रिय हैं पर कुछ ऐसी भी चीजें है, जिन्‍हे भगवान शिव पर कभी अर्पित नही करनी चाहियें। आज ऐसी ही 8 सामाग्रियों के संबंध में बताने वाले है जो कुछ इस प्रकार से है…

तुलसी- तुलसी जिसके बारे में कहा जाता है की जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ था जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया है। इसलिए तुलसी से शिव जी की पूजा नहीं होती। एक प्राचीन कथा के मुताबिक जलंधर नामक राक्षस से सब त्रस्त थे लेकिन उसकी हत्य नहीं हो सकती थी क्यों कि उसकी पतिव्रता पत्नी वृंदा के तप से उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता था। तब विष्णु ने छल से वृंदा के पति का वेष धारण किया और उसका धर्म भ्रष्ट कर दिया उधर भगवान शिव ने जलंधर का वध किया। तब पवित्र तुलसी ने स्वयं भगवान शिव को अपने स्वरूप से वंचित कर यह शाप दिया था कि आपकी पूजन सामग्री में मैं नहीं रहूंगी।

शंख से जल- संख जो की शिव जी को नही चढ़ाना चाहिए कहा जाता है की भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था। इसलिए विष्णु भगवान की पूजा तो शंख से की जाती है लेकिन शिव की नहीं।

तिल- यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाता।

खंडित चावल- भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा मिलता है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए कभी भी यह शिव जी को नहीं अर्पित करना चाहिए।

नारियल पानी- महादेव को भले ही नारियल अर्पित किया जाता है, लेकिन कभी भी नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। आमतौर पर देवताओं को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को ग्रहण किया जाता है, लेकिन शिवलिंग पर जिन पदार्थों से का अभिषेक होता है उन्हें ग्रहण नहीं किया जाता। इसलिए शिव जी पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

कुमकुम- सिंदूर या कुमकुम विवाहित महिलाओं का गहना माना जाता है स्त्रियां अपने पति के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए सिंदूर लगाती हैं। इसके उलट महादेव त्रिदेवों में विनाशक हैं। लिहाजा सिंदूर से उनकी सेवा करना अशुभ माना जाता है। यह सौभाग्य का प्रतीक है जबकि भगवान शिव वैरागी कहे जाते हैं इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ता।

केतकी फूल- केतकी का फूल को भगवान शिव ने क्यों त्याग दिया, इसका उत्तर शिवपुराण में बताया गया है। कहा जाता है इस फूल का विस्तार रक्छस के अंग से हुआ है इसलिए सको भगवान् शिव पसंद नही कार्य| और ये फूल कभी भी भगवान् भोलेनाथ को नही चढ़ाया जाता है।
हल्दी- गुणों की खान हल्दी का भले ही स्वास्थ्यवर्धक हो। सुंदरता बढ़ाने के लिए किया जाता हो, लेकिन शिवलिंग पर कभी हल्दी नहीं चढ़ाई जाती, क्योंकि वह स्वयं शिव का रूप है, इसलिए हल्दी को निषेध किया गया है। हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से है इसलिए यह भगवान शिव को नहीं चढ़ती है।
इस जानकारी के संबंध में आप अपनी महत्‍वपूर्ण रॉय अवश्‍य लिखें।

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