आखिर क्यों सचिन तेंदुलकर ने कहा, ‘मैंने तो कभी यो-यो टेस्ट नहीं दिया’वजह जानकर रह जायेंगे दंग…

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मित्रों इस बात से तो आप सभी अवगत ही होगें कि खेल जगत में भी कुछ ऐसे नियम है। जिनका पालन करना टीम के सभी खिलाडि़यों का दायित्‍व रहता है। हालांकि कुछ ऐसे भी नियम है जिनपर कभी कभी कुछ सवाल भी उठे है। जैसे कि इन दिनो यो यो टेस्‍ट सवालों के घेरे में है। इन दिनों यह एक चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर ने इस पर सवाल उठाते हुये कहा कि मैने तो कभी यो – यो टेस्‍ट नही दिया।

आपको बता दें कि यो-यो टेस्‍ट का महत्‍व खिलाड़ी के फिटनेस से संबंधित होता है। किसी भी महत्‍वपूर्ण मैच होने से पहले यो यो टेस्‍ट का प्राविधान है, जिसे खेल जगत के सभी खिलाड़ी फॉलों करते है, हालांकि ऐसा कोई नियम पहले के दशकों में नही रहा है, यही कारण हैकि पहले यो यो टेस्‍ट को कोई महत्‍व नही था, पर मौजूदा समय में इस टेस्‍ट को अनिवार्य कर दिया है, जबकि इस पर सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि अगर यो – यो टेस्ट को ही भारत की ओर से खेलने के लिए बस एक पैमाना बनाया गया है, तो यह ठीक नहीं। टीम में नियुक्ति के लिए इस टेस्ट को अनिवार्य करना आवश्‍यक नही होना चाहिये।
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यो- यो टेस्‍ट के संबंध में सचिन ने सवाल उठाते हुए कहा है, कि – मुझे लगता है, कि फील्डिंग के लिए निश्चित मानक आवश्‍यक है। मैंने कभी यो-यो टेस्ट नहीं दिया,  हां इतना अवश्‍य है, कि बीप टेस्ट दिया करते थे जो कम ओ बेश यो-यो जैसा ही था, आगे सचिन ने बीच का रास्ता निकालने की सलाह देते हुए कहा, यो – यो ही टीम में चुने जाने का पैमाना नहीं होना चाहिए। इसे खिलाड़ी की फिटनेस और उसकी योग्यता का मिश्रण होना चाहिए। मुझे लगता है यो-यो महत्वपूर्ण है, पर ध्यान देना चाहिए कि खिलाड़ी कितना फिट और अनफिट है, साथ ही उसकी योग्यता पर भी विचार किया जाना अतिआवश्‍यक है। सचिन तेंदुलकर के इस विचार के संबंध में आप लोगों की क्‍या प्रतिक्रियायें है? कमेंट बॉक्‍स में अपनी महत्‍वपूर्ण रॉय अवश्‍य लिखें।

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